कविता · Reading time: 1 minute

मान भी मिलने लगा

चाटुकारों से विलक्षण ज्ञान भी मिलने लगा
वोट के हित द्रोहियों को ध्यान भी मिलने लगा
क्या कहूँ, सम्वेदना की मृत्यु होती देख के
आज साहित्यिक गधों को मान भी मिलने लगा
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

23 Views
Like
15 Posts · 517 Views
You may also like:
Loading...