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माँ की ममता

कविता
मां की ममता
मां की ममता सच्ची ममता, मां के प्यारे मीठे बोल,
मां के प्यार का मोल नहीं, मां का प्यार तो है अनमोल।
जाने कितने दुख सहती है, पर बच्चों को सुख देती है,
झेले है खुद, पर बच्चों पर, आंच नहीं आने देती है,
उसकी कुर्बानी का तुम बोलो, क्या दे सकते कोई मोल,
मां की ममता सच्ची ममता, मां के प्यारे मीठे बोल।
जो भी मां की करता इज्जत, सदा सुखी रहता जीवन भर,
जिसको मां की मिलें दुआएं, खुशियों से लेता दामन भर,
मां से बढ़कर कोई नहीं है, चाहे ढूंढो दर-दर डोल,
मां के प्यार का मोल नहीं, मां का प्यार तो है अनमोल।
सबसे पहले सुबह है उठती, सब सो जाए तब है सोती,
सोते-सोते में भी बार-बार वह, बच्चों की खातिर है उठती,
हो जाए बीमार कोई तो, जगती रहती आंखें खोल,
मां की ममता सच्ची ममता, मां के प्यारे मीठे बोल।
करती है वह प्यार बराबर, कम किसी से न ज्यादा,
उसकी आंख के तारे बच्चे, कोई परी, कोई शहजादा,
प्रथम गुरु है संस्कारों की, घुट्टी में है देती घोल,
मां के प्यार का मोल नहीं, मां का प्यार तो है अनमोल।
-पंकज शर्मा, शहर (हरियाणा)

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पंकज शर्मा
पंकज शर्मा
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