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माना मै मर रहा हूँ

शिवदत्त श्रोत्रिय

शिवदत्त श्रोत्रिय

मुक्तक

August 30, 2016

बेटो के बीच मे गिरे है रिश्‍तो के मायने
कैसे कहूँ कि इस झगड़े की वजह मै नही हूँ |

कुछ और दिन रुक कर बाट लेना ये ज़मीं
माना मै मर रहा हूँ, लेकिन मरा नही हूँ ||

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शिवदत्त श्रोत्रिय
हिन्दी साहित्य के प्रति रुझान, अपने विचारो की अभिव्यक्ति आप सब को समर्पित करता हूँ| ‎स्नातकोत्तर की उपाधि मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की और वर्तमान समय मे सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर मल्टी नॅशनल कंपनी मे कार्यरत... Read more
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