23.7k Members 49.9k Posts

मानवता

.
आज नर नराधम निज
स्वार्थ में क्यो खो रहा है,
बन पिशाचर लालसा में
अपने मगन क्यो हो रहा है।
.
काँपती हुई इस धरा को
क्यो देख इंसा जगता नही,
मूंद बैठे है सबने आँखें
बियाबान चमन ये हो रहा है।।
.
दिल मे काँटे, मन मे ईष्या
है बिखेरा क्यों हलाहल,
छोड़ कटुता , कपट, छल जो
हो जाये हम भी आज निच्छल।
.
नामों निशान मिट जाएगा
मतभेद जाती धर्म का,
फिर बहेगा प्रेम पावन
ले पवन भी संग निर्मल।।
.
ना करो इन्तेजार कोई
यहाँ राम, गौतम बुद्ध का,
है समय तो आज केवल
निज आत्मा मन शुद्ध का।
.
खुद करो अब प्रण की
समभाव हो हर दृष्टि का,
आओ “चिद्रूप” संग जलाओ
चिराग एक नए सृष्टि का।।
.
©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित २५/१०/२०१८ )

Like 11 Comment 0
Views 7

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
पाण्डेय चिदानन्द
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
रेवतीपुर, देविस्थान
143 Posts · 3.7k Views
-:- हो जग में यशस्वी नाम मेरा, है नही ये कामना, कर प्रशस्त हर विकट...