कविता · Reading time: 2 minutes

मानवता का गान है हिंदी

जन गण मन की जान है हिंदी
भारत की पहचान है हिंदी
मानवता का गान है हिंदी
प्रेम सत्य और करुणा का
गीत और यश गान है हिंदी
शब्द ब्रह्म संसार है हिंदी
जन गण मन का प्यार हिंदी
भारत मां का दुलार है हिंदी
बंधी नहीं यह सीमाओं में
सीमित नहीं अपार है हिंदी
जन गण मन की भाषा है
जगजीवन की आशा है
अंतर्मन का तार है हिंदी
एक मधुर उपहार है हिंदी
मानवता का सार है हिंदी
जन गण मन का गीत है हिंदी
सारे जग की मीत है हिंदी
भाईचारा प्रीत है हिंदी
प्रेम गीत की रीत है हिंदी
रामचरित का गान है हिंदी
मीरा का अमृत पान है हिंदी
नील गगन की शान है हिंदी
जन गण मन की प्राण है हिंदी
गीत प्रेम के गाती है
आशा के दीप जलाती है
हिंदी अपने अबदानों से
दुनिया को राह दिखाती है
प्रेम शांति बलिदानों की, गौरव की गाथा गाती है
त्याग तपस्या और करुणा के, पाठों से महकाती है
मानवता को उच्च शिखर पर, आगे सदा बढ़ाती है
हिंदी है जन मन की भाषा, अमन शांति फैलाती है
हिंदी है मां की ममता, हिंदी नेह दादी नानी
हिंदी है इस जग की समता, दुनिया ने इसको पहचानी
अद्भुत अमर साहित्य की जननी, हिंदी है मीठी वाणी
सबका मंगल गान करें, सबका रखती ध्यान
सबका ही कल्याण करें, सबको देती ज्ञान
हर बोली भाषा भाषी का, दिल से करती है सम्मान
यह गीत प्रेम के गाती है, दसों दिशा मेंहकाती है
अथाह कथा सागर से चुन चुन, किस्से रोज सुनाती है
सदा हाथ में थाम तिरंगा, गीत अमन के गाती है
विश्व की हर बोली भाषा का, हिंदी सम्मान जगाती है
हिंदी ने भारतवासी को, एक सूत्र में जोड़ा
ऐसा रंगा बसंती चोला, तंत्र गुलामी का तोड़ा
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण ,दसो दिशा मेंहकाई
प्रजातंत्र का उदय हुआ, हमने आजादी पाई

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