कविता · Reading time: 1 minute

मात पिता

मात-पिता श्रद्धेय सदा, पूज्य ईश समान
उनके इर्द-गिर्द बसे,अपना सकल जहान
कलयुगी सुत कर रहे, अपमान उनका घोर
करोगे जैसा भरोगे , लीजिये यह जान ।

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