Jul 16, 2016 · कविता

मात पिता

मात-पिता श्रद्धेय सदा, पूज्य ईश समान
उनके इर्द-गिर्द बसे,अपना सकल जहान
कलयुगी सुत कर रहे, अपमान उनका घोर
करोगे जैसा भरोगे , लीजिये यह जान ।

6 Views
poet and story writer
You may also like: