कविता · Reading time: 1 minute

मातृ शक्ति

माँ का आँचल बड़ा ही शीतल और शान्त
मिलती है जहाँ पर अपार जन्नत और राहत

जिस कोख से उसने हमें जन्म दिया
जग में आने का हमें शुभावसर दिया
निज खुशियों का हरण सदा करते हुए
जो भी चाहा वो सब दिया बिन आहत

माँ का दर्जा सबसे ऊँचा रहा है सदा
सृष्टि की संरचना हुई है जब से यदा
खुदा के नाम के बाद नाम आता है मात
जन्मदायिनी प्रसविनी प्रसवित्री मात

धात्री सर्वश्रेष्ठ नियामत है कायनात पर
मातृ शक्ति सी शक्ति नहीं हैं वसुंधरा फर
कुटुंब कुटीर को बाधें रखे एकता सूत्र में
रिश्ते जोड़ना निभाना सीखाती है मात

मोम सी कोमल और लचीली होती है माँ
बलिदान की जिन्दी जागती मूरत है माँ
तात से पहले नाम सदा आता आया है मात
पालनहारी करुणामयी दुखहरणी है मात

माँ बेटी माँ बेटे का है रिश्ता सबसे प्यारा
प्रेमवशीभूत सदभावी अनुरागी है न्यारा
सूता की तो जनयत्री सखा सहेली होती
हमसाया हमराज परछाई होती है मात

माँ का आँचल बड़ा ही शीतल और शान्त
मिलते हैं जहाँ पर अपार जन्नत और.राहत

सुखविंद्र सिंह मनसीरत

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