मातृशक्ति देवी तुझे शत् शत् नमन |

मातृशक्ति देवी तुझे शत् शत् नमन |

नारी अनेक भूमिका अदा करती है | कभी माँ बनकर ,
कभी बहन बनकर, कभी पत्नी तो कभी बेटी बनकर,
इस शक्तिस्वरूपा की सबसे विशेष बात है – इसके अंदर कभी
न समाप्त होने वाला साहस, धैर्य |
आज नारी को इस धैर्य की परीक्षा हर स्थान पर देनी पड़ रही है ,
पर अब समय आ गया है जब वह अपना दूसरा रूप प्रकट कर
प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करने की हक़दार बन गयी है |

है तू वात्सल्य सरोवर की धारा,
जीवन भर ख़ुशी से सब सहती,
है तपस्या की देवी तू ,
हर कुटुंब की सेवी,
करती धैर्य से हर घाव सहन ,
हे मातृशक्ति देवी तुझे शत् शत् नमन !

है हर घर को महकती,
ममता रस बरसाती ,
अपनों के हित सपने सजाये ,
कभी देवी स्वरूपा कहलाती तो कभी सुंदरता पर इठलाती ,
तेरे पवित्र संसर्ग में पाप हो दहन,
हे मातृशक्ति देवी तुझे शत् शत् नमन !

है काली का रूप तू ,
भयंकर तेरी हुंकार,
शत गजो का बल तुझमे,
सहस्त्र नागों की फनकार ,
सूरज भी शर्माता,
झुकता यह गगन,
हे मातृशक्ति देवी तुझे शत् शत् नमन !
प्रेरणा

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