माटी का लोथा

माटी के लोथे थे हम चलता खिलौना बनाया आपने ।
कोरा काला कागज थे हम सुनहरी जीवंत कविता बनाया आपने ।
स्थूल पड़े पत्थर थे हम मीनार की ऊँचाईया दी आपने ।
जंग खाकर खत्म होने वाले लोहे थे हम कीमती सोना बनाया आपने ।
दुनिया से हम और हमसे दुनिया अनजान थी पहचान बनाई आपने ।
धन्य हो मात पिता जिन्होने खुद नींव का पत्थर बन हमें कंगूरा बनाया आपने ।

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