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माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान

हिमकर श्याम

हिमकर श्याम

दोहे

October 26, 2016

चाक घुमा कर हाथ से, गढ़े रूप आकार।
समय चक्र ऐसा घुमा, हुआ बहुत लाचार।।

चीनी झालर से हुआ, चौपट कारोबार।
मिट्टी के दीये लिए, बैठा रहा कुम्हार।।

माटी को मत भूल तू, माटी के इंसान।
माटी का दीपक बने, दीप पर्व की शान।।

© हिमकर श्याम

Author
हिमकर श्याम
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और ब्लॉगर http://himkarshyam.blogspot.in https://doosariaawaz.wordpress.com/
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