*मां"

मां सेवा _मां मेवा
मां देवों का देव
मां पूजा
मनसा कोई न दूजा
मां सागर मां करुणाकर
मां स्नेह नीर की गागर
मां आराधन मां स्पंदन
मां हर रिश्तो का बंधन
मां प्यार हर क्षण तैयार
मां जीवन का उपहार
मां साधना मा ही आराधना
मा ही तारणहार
मां ममता मा ही क्षमता
मां हर दिन का त्योहार
मां मोती मां जीवन ज्योति
मां महकता हार
मां कर्म मां ही मर्म
मां में मानवता का धर्म
मां ज्ञान जगत का मान
मा ही भगवान
हर इंसान ले यह जान
मा ही सम्मान
देती मां दान सांसों को पहचान
सब थके
मां को कहां थकान
“राजेश व्यास” (अनुनय)

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