मां

सुना है रहबरों के किस्से बड़े सुहाने होते है ।
मां तो मां होती है मां के किस्से कहां पुराने होते है।।
मां की ममता का कोई मोल नहीं होता है यारो ।
उसके आंचल में छिपी सारी दुनिया के खजाने होते है।।

मां मुझको सीने से चिपकाकर खुद गिले बिस्तर पर सो जाती है ।
मां मुझे सुलाने की खातिर कई रातें जाग बिताती है।।

मां की लोरी सुन सुन कर खुद अम्बर भी सो जाते है ।
मां की मधुर ध्वनि में सातों सुरो के कीर्तन होते है।।

मां गीता जैसी पावन है मां मरियम और खदीजा है।
मां की जैसी कोई और नहीं मां मक्का और मदीना है ।।

मुझे बुरी नजर ना लग जाये मां क़ाला टीका करती है ।
ना दुनियां की काली साया पड़े मां आंचल तले सुलाती है।।

मां के चरणों में मै सारे तीरथ का फल पाता हूं।
मां के चरणों को छू कर मै भी गंगा जल बन जाता हूं।।

मां गंगा की गहराई है मैं माता की परछाई हूं।
मां रिश्तों की गहराई है मै उसकी खून से जाई हूं।।

मां के चरणों में जीवन का सारा सुख मिल जाता है।
मां छूले जिस पत्थर को वो भी पारस बन जाता है ।।

मां संस्कारो की रेखा है मै मां के चरणों में लेटा हूं ।
मां पुण्य का लेखा जोखा है मां नहीं है जिनकी मै उन माओ का बेटा हूं।।

“””””””””””””””””सत्येन्द्र बिहारी”””””””””””””””

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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