मां

किसी की भी नजरों में
मां का प्यार नजर ही नहीं आता है
मां की लोरी सुनने वालो
मां का दर्द ए हाल नजर नहीं आता है
अपने आंसु बचा कर रखना
गमों का तूफान कहकर नहीं आता है
इतने कठोर मत बनो
गुजरा लम्हा लौट कर नहीं आता है
मां की तबियत का ख्याल रखना
मां का प्यार बार बार नसीब में नहीं आता है
आज जो तुम्हें मां का जरा भी
ख्याल नहीं आता है
तो फिर कल औलाद के सुख का
सपना तुम्हें भी क्यों आता है

एम के कागदाना

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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