कविता · Reading time: 1 minute

मां

किसी की भी नजरों में
मां का प्यार नजर ही नहीं आता है
मां की लोरी सुनने वालो
मां का दर्द ए हाल नजर नहीं आता है
अपने आंसु बचा कर रखना
गमों का तूफान कहकर नहीं आता है
इतने कठोर मत बनो
गुजरा लम्हा लौट कर नहीं आता है
मां की तबियत का ख्याल रखना
मां का प्यार बार बार नसीब में नहीं आता है
आज जो तुम्हें मां का जरा भी
ख्याल नहीं आता है
तो फिर कल औलाद के सुख का
सपना तुम्हें भी क्यों आता है

एम के कागदाना

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