23.7k Members 50k Posts

मां

तुम जीवन का सार तत्व,अमरत्व लिए निर्भीक रहो।
हो आंचल मैला कभी न तेरा, ऐसी बनी पुनीत रहो।।

दुर्गम जीवन के पग – पग पर,तेरा आस्तित्व विरक्त रहे।
जीवन दुःख दर्द से दूर,जब तलक बनी कृपा की दृष्टि रहे।।

शक्ति भक्ति निर्भीक रक्त ने,ऐसे बीज भरे मन में।
जैसे मां भारती ने मुझको ,खुद भेजा हो अपने रण में।।

शुभचिंतक हो सुविनिता हो,खुद स्वयं भागवत गीता हो।
अपना जीवन सुख त्याग धन्य,धा माय बनी या सीता हो।

जब जब मुझ पर संकट दिखता,तेरा मन क्रंदन करता है।
हे भुवानवासिनी मां तुझको,मेरा सिर बंदन करता है।।

जब बचपन में था गिरा उठा,तूने प्रथ्वी को डाटा था।
उस पल लगता था मां तुझसे,ना दूजा बड़ा विधाता था।।

तेरी हर बात गढ़ी मैने,जीवन के साथ पढ़ी मैने।
तेरा दिल इतना कोमल है,जैसे दिखता हो दर्पण में।

मां जब जब भी पूजा करता,बस एक दुआ मांगा करता।
इस धरा पर जब भी जन्म मिले, मां मुझको तेरा उदर मिले।।

योगेन्द्र पाल
पता – ग्रा. चक , पो. लखनौर
जिला – हरदोई
मो.- 9651881937

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

Voting for this competition is over.

Votes received: 33

7 Likes · 28 Comments · 206 Views
Yogendra pal
Yogendra pal
HARDOI UTTAR PRADESH
1 Post · 206 View