मां

हां सच कहूं तो
मेरी शक्ति की मेरी भक्ति की
मेरे सांस की मेरे धड़कनों की
मेरे जज्बातों की
मेरे एहसासों की
मेरी पूरी की पूरी कायनात की
कुंजी हो तुम मां

मेरा जिंदगी भी मेरी जायदाद भी
मेरा वर्तमान भी मेरा भविष्य भी
मेरा रास्ता भी मेरी मंजिल भी
मेरी पहली किताबें और मेरे ज्ञान की
कुंजी हो तुम मेरी मां

मेरा कण कण तुमसे रूह भी तुमसे
मुक्ति भी और जीवनदान भी तुमसे
हर एक छन और हर एक लम्हा भी तुमसे
शब्दों का सागर भी मन के उमंग की
कुंजी हो तुम मेरी मां

साथ रहती हो तो
किस्मत का ताला खोल लेता हूं
पाकर तुम्हें
मालामाल हो लेता हूं
जो यह कुंजी हमेशा साथ रहे
ईश्वर को भी जीत लेता हूं
मेरी मां

लिखने को तो बहुत है
पर लिख ही नहीं पाता हूं
जीवन में सर्वस्व ताले की
कुंजी रुपी मां को पा
मैं धन्य धन्य हो जाता हूं
🙏🙏🙏🙏🙏🙏

सौरभ अग्रवाल
सहरसा बिहार

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