मां

माँ
______

सबसे प्यारा और अनोखा !
रिश्ता अपनी “माँ” का है |
तीनों लोक समा जाएेंगें…..
ऐसा आँचल ” माँ ” का है ||
जननी बनकर जन्मा है
और सद्गुण से पाला है |
आए कोई आफत हम पर !
वो बनी हवन की ज्वाला है ||
भरी लबालब ममता से ,
कोई कोना ना रीता है |
वो बसी है……
कुरान-बाइबल में !
“माँ ” ही कर्म-ए-गीता है ||
माँ के चरणों में मंदिर है ,
हाथों से बहता है आशीष |
सारे तीरथ फीके पड़ते |
देखो करके नीचा शीश ||
अपना व्रत कभी ना तोड़े !
चाहे टूटे सकल शरीर |
“माँ ” की ममता और हिम्मत से ,
बदली कितनों की तकदीर ||
छवि निराली उज्ज्वल-उज्ज्वल ,
तन-मन से माँ सबला है |
माँ के पैरों में जन्नत है !
माँ काशी , माँ कर्बला है ||
जिसकी छाती से फूटी !
अजस्त्र अमृत की धारा |
मानव-बीज पला है उसमें !
फलित हुआ ये जग सारा ||
अनमोल धरोहर अपनी माँ !
दुर्लभ है बनना सदासहाय |
या तो ईश्वर या धरती है !
या सम उसके अपनी माय ||

____________________
— डॉ० प्रदीप कुमार “दीप”
ग्राम-पोस्ट- ढ़ोसी
तहसील-खेतड़ी
जिला – झुन्झुनू (राजस्थान)
पिन – 333036
मो० – 9461535077

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 47

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 10 Comment 34
Views 406

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share