Nov 1, 2018 · कविता
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मां

मां संग सब जहान है
मां बिन सब श्मशान है!
मां है तो मैं हूं
मां संग अस्तित्व है मेरा!
एक साझा रिश्ता है मां
कभी सहेली कभी मां ऐसा अनोखा बंधन है मां!
कभी प्यार कभी डांट
कभी हंसी कभी मजाक
ऐसा अटूट विश्वास है मेरी मां!
मेरा दिल मेरी धड़कन
मेरा संसार है मेरी मां!
बिन कहे बिन बोले सब कुछ जानने वाली
मेरा हर कदम पर साथ देने वाली
आठवां अजूबा है मेरी मां !

“मां जैसा कोई हो नहीं सकता
ना हम मां जैसे हो सकते
मां के प्यार से बड़ी संसार में कोई दौलत हो नहीं सकती”

– मनीषा भारद्वाज
पानीपत

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Manisha Bhardwaj
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