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मां मार मुझे मत गर्भ में

मां मार मुझे मत गर्भ में
यह तो है मेरा अद्भुत सुरक्षा कवच
जिसमें मैं आकार लूंगी
तुम्हारे स्नेह के साथ
तुम्हारी कल्पनाओं और ख्वाबों के साथ
मेरी धड़कन है तुम्हारी हर श्वास के स्पर्श में
मां मार मुझे मत गर्भ में

तुम भी नारी हो, पहल तुम्हें ही करनी होगी
दुनिया के तानों से लड़ने की, हिम्मत पैदा करनी होगी
माता तो विधाता का भेजा हुआ एक सुंदर फरिश्ता है
मां बेटी का तो इस जग में बहुत ही प्यारा रिश्ता है
मेरी रक्षा करना मां तेरा ही तो धर्म है
मां मार मुझे मत गर्भ में

दादी को समझाना मैं उनकी बगिया की फुलवारी हूं
पापा को यह बतलाना मैं उनकी राज दुलारी हूं
पापा के सपनों को मैं साकार करूंगी
ऊंचे सोपानों पर चढ़कर उनका जग में नाम करूंगी
गर्व महसूस करो मुझको इस जग में लाकर
बिटिया को जन्म देना क्या कोई शर्म है ?
मां मार मुझे मत गर्भ में

डॉक्टर संगीता महेश

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Poet, author, critic & Asst. Professor in Moradabad Institute of Technology, Moradabad Books: Poetry collection- Ocean of Thoughts, Poems about Social Issues and Human Values
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