मां तू भगवान की मूरत है

मां तू भगवान की मूरत है
तू मेरे लिए सबसे खूबसूरत है
जब तुजसे दूर जाता हूं मैं
तू बैठ कर इन्तज़ार करती…

तू राह ऐसे निहारती
गाय से बछड़ा बिछड़ गया हो
तूने मुझे पाला बड़ा किया
ये ऐसन कैसे चुकाऊंगा

मां तू भगवान की मूरत है
तूने अपार दुख सक कर
मुझे पाला बड़ा किया
मां तू भगवान की मूरत है

इस जग में तेरे जैसा कोई नहीं
जब जब अति आंच है मुजपें
तू आंचल में छुपा लेती है
मां तू भगवान की मूरत है।।

कुंवर नितीश कुमार सिंह
अलीपुर बनगावा ( गाजीपुर)

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 54

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 10 Comment 49
Views 306

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share