मां तू भगवान की मूरत है

मां तू भगवान की मूरत है
तू मेरे लिए सबसे खूबसूरत है
जब तुजसे दूर जाता हूं मैं
तू बैठ कर इन्तज़ार करती…

तू राह ऐसे निहारती
गाय से बछड़ा बिछड़ गया हो
तूने मुझे पाला बड़ा किया
ये ऐसन कैसे चुकाऊंगा

मां तू भगवान की मूरत है
तूने अपार दुख सक कर
मुझे पाला बड़ा किया
मां तू भगवान की मूरत है

इस जग में तेरे जैसा कोई नहीं
जब जब अति आंच है मुजपें
तू आंचल में छुपा लेती है
मां तू भगवान की मूरत है।।

कुंवर नितीश कुमार सिंह
अलीपुर बनगावा ( गाजीपुर)

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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