Nov 18, 2018 · कविता
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मां की महिमा

मां ईश्वर के प्रति छाया
मां करुणता की काया
मां विधि का वरदान
मां कभी कोमल तो कभी चट्टान,
कभी वह तोड़ती पत्थर,
हुई निराला का गान,
मां स्वप्नरूपी चुनर में
पुरुषार्थ की सुई से
सितारे टांगने वाली,
मां संतान का स्नेह स्त्रोत
जैसे गांधारी तोड़ प्रतिज्ञा
अंखियों के झरोखों से झांकने वाली,
बहुत कठिन है मां को
शब्दों के सांचे में ढालना
मां होती है संतान का प्रथम पालना,
मां के आंचल में ममत्व का
मेघ बरसता है
मां की ममता पाने को
ईश्वर भी तरसता है

– नागेंद्र गुर्जर ‘मनमीत’
गांव – बोरखेड़ी,
पोस्ट- करेड़ी (माताजी) ,
तहसील- तराना,
जिला- उज्जैन
(मध्य प्रदेश)
456770

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Kavi Nagendra Gurjar
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