Nov 7, 2018 · कविता

मां की ममता

मां सा दुनिया में दूजा है और नहीं
मां की ममता का कोई भी छोर नहीं मां ही

मां की कोख में मैं नौ मास रहा
मेरी ख़ातिर मेरी मां ने दुख को सहा

मेरा बोझा उठाया दिनो रात को
अपने खून से सींचा मेरे गात को

लडके दुनिया से मां ने है पाला मुझे
तन के सांचे में मां ने है ढाला मुझे

सोई गीले में सूखे में सोया हूँ मैं
मां तडफती थी जब जब भी रोया हूं मैं

मां का दूध पिया बडे अधिकार से
मां की ममता अलग सारे संसार से

मां की गोदी में सारा जहां मिल गया
मेरे जीवन का प्यारा चमन खिल गया

बिना लालच बडा प्यार देती है मां
और बदले में कुछ भी ना लेती है मां

मात ही प्यार है गंग की धार है
मां ही आधार है मां ही पतवार है

मां मेरी शान है मेरी पहचान है
मां मेरा मान है मेरा अभिमान है
.
मानती ही नहीं है कभी हार मां
वास्तव में है धरती का श्रृंगार मां

आजाद मंडौरी लिखा सार है
मेरा रोम रोम मां का कर्जदार है

कवि आजाद मंडौरी पलवल हरियाणा

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