कविता · Reading time: 1 minute

” मां की नहीं कोई परिभाषा “

मां शब्द की कोई परिभाषा समझ नहीं आता ,
जो लिखना चाहूं वो लिखा नहीं जाता।

हर बात तु बीन कहे समझ जाती ,
जिंदगी की हर खुशी तेरे गोद में ही मिल जाता ।

तेरी ममता से ही संतुष्टि आता ,
तु ही प्यार की अद्वितीय परिभाषा ।

मां से ही सारी दुनिया जगमगाता ,
इस मां शब्द की गाथा क्षितिज तक जाता ।

मां सिर्फ स्त्री को कहां नहीं जाता ,
पिता , भाई , बहन , दोस्त सभी से है ममता का नाता ।

तेरे तुलना अब तक ना कर पाया विधाता ,
ज्योति भी ना गढ पाएगी तेरी गाथा ।

मां तेरी ममता की कोई नहीं परिभाषा ,
लिखना चाहूं पर कलम रूक जाता ।

( मातृ दिवस के अवसर पर संसार की सभी मां को समर्पित । )

🙏 धन्यवाद🙏

✍️ ज्योति ✍️
नई दिल्ली

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