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मां का प्यार

मां शब्द में समाई है दुनिया
अनोखे अनूठे अंदाज में बनाई है दुनिया
मां ने बच्चों की चाहत में बसाई है दुनिया
अनमोल अद्भुत लोरियों से सजाई है दुनिया
ममता ने कहा तू हृदय है मेरा
आंखों में बसा नूर है मेरा
समपर्ण में प्यार का रुप है मेरा
अनोखे संसार का प्रतिरूप है मेरा
शैशव सोचता है मां का प्यार शाश्वत है
मां का स्पर्श सुबह की शीतल हवाओं सा है
ओस की बूंदों के एहसास सा है
सर्द हवाओं में गर्माहट के लिबास सा है
ईश्वर भी झुक जाए आगे उसके
ये तो उसके पूजा पाठ सा है।

कुंती नवल
नवी मुंबई
महाराष्ट्र

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Kunti Naval
Kunti Naval
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