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मां का कर ले ध्यान तू

मां शारदे की कृपा के बिना सब असंभव है
देखें एक कुंडलियां छंद

मां का कर ले ध्यान तू, मां करती कल्यान।
शब्द-शब्द में भाव भर,करती है उत्थान।
करती है उत्थान,रचे नित ही नव रचना।
जगत मोह बिसराय, करो अब महज अर्चना।।
कहै अटल कविराय, छोड़ अब मद जीवन का।
मां ही करती पार,ध्यान कर ले तू मां का।

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साहित्यिक नाम-अटल मुरादाबादी विधि नाम-विनोद कुमार गुप्त शिक्षा-बी ई(सिविल इंजी०) एम०बी०ए०,एम०फिल(एच आर एम) सम्प्रति -सरकारी विभाग में सिविल इंजीनियर रुचि-हिन्दी साहित्य ,समाज सेवा व शिक्षा महामंत्री -दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन”सनेही…
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