Nov 1, 2018 · कविता

माँ

ज़िन्दगी का सबक़ हर सिखाती है माँ।
थाम उंगली ज़माना दिखाती है माँ।

कुछ समय को अगर दूर जाना कहीं।
वक़्त रहते ही तुम लौट आना यहीं।
इस जहाँ में कोई दूजा मिल भी गया,
प्यार देगा मगर माँ सा होगा नहीं।
नींद आए न लोरी सुनाती है माँ,
गोद मे रख के सर को सुलाती है माँ।

रात दिन मेरी चिंता उसे रहती है।
लाल मेरा सुधर जा यही कहती है।
लड़ झगड़ने पे नाराज़ होती नहीं,
एक माँ है जो गुस्सा मेरा सहती है।
लाख नखरे भी मेरे उठाती है माँ,
रूठ जाऊँ तो मुझको मनाती है माँ।

शक़ कभी मां की ममता पे करना नहीं।
छोड़ आंचल दुपट्टा पकड़ना नहीं।
माँ अगर रूठी रूठे सभी देवता,
इसलिए बस गलत पथ तू चलना नहीं।
इस जहाँ की फ़िजाओ में लाती है माँ,
इसलिए रात दिन याद आती है माँ।

विकास सोनी ऋतुराज
शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश

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