(((( माँ ))))

जब बिन बोले माँ से, कही देर तलक रह जाते हैं!
जब अपने मित्रो के संग कही, मस्ती मे खो जाते हैं!
जब घर पहुँचने को हमे, जरा देरी से हो जाती हैं!
तब मेरी माँ मुझे देखने को,
घर की खिड़की पर आ जाती हैं!!
जब दूर-दूर न दिखने पर, उनका दिल मचलता हैं!
मेरी चिंता मे माँ दिल, ज़रा और तड़पने लगता हैं!
जब शोर-शराबे वाली गलियां, उनको सुनी-सुनी सी लगती है!
तब माँ मुझे ढूंढने को, पनघट तक आ जाती है!!
जब दूर कही से उनको मैं, आता दिखाई देता हूँ!
पहले डॉट सुनाती है, फिर समझती है!
इतने सारे गुस्से ने भी, एक एहसास दिखाई देता है!
हर डॉट मे माँ के मेरे, मुझको प्यार दिखाई देता है!!

(ज़ैद बलियावी)

ग्राम :- बिठुअा
पोस्ट :- बेल्थरा रोड
ज़िला :- बलिया (ऊ.प्र.)
पि.न. :- 221715

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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