23.7k Members 49.8k Posts

माँ

माँ
माँ का नाम स्मरण ही , दुःखों का निवारण हैं ।
माँ का आशीर्वाद ही , सभी सुख-समृद्धि वरण हैं।।
माँ का आँचल ही जन्नत है ।
माँ की ममता ही प्रेम-करुणा की मुरत हैं ।
माँ का स्वरुप ही ब्रह्मण्ड हैं ।
माँ का अस्तित्व ही अखण्ड हैं ।।
इसलिए –
माँ का ना करो अनादर ,
माँ की आवाज़ आते ही दौड़े चले जाहिऐ।
माँ को कुछ नही चाहिऐ ,
बस एक आपकी नजदीक की झलक चाहिऐ ।।
सारा जग सुख-दुःख में उलझा हुआ हैं ।
अपने कर्तव्य में दौड़ कर सुलझा रहा हैं ।।
बस थोड़ा समय चुराकर दो मिठे बोल बोलना है ।
बस थोड़ा समय चुराकर दो मिठे बोल बोलना है ।।
कापीराइट –
– राजू गजभिये
बदनावर जिला धार ( मध्यप्रदेश )
पिन – 454 660
प्रमाणित किया जाता है की माँ कविता
स्वरचित हैं ।
– राजू गजभिये
बदनावर जिला धार ( मध्यप्रदेश )

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

Voting for this competition is over.

Votes received: 27

Like 5 Comment 23
Views 179

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Raju Gajbhiye
Raju Gajbhiye
Badnawar Dist Dhar M.P.
57 Posts · 9k Views