माँ

माँ
सृष्टि
स्पंदन
अनुभूति
सप्त स्वर में
गूँजता संगीत
वट वृक्ष की छाँव।

माँ
आँसू
ममता
सम्वेदना
गोद में लोक
जीवन आलोक
निर्झर-सा प्रवाह।

माँ
शब्द
क़लम
रचना है
कैनवास है
सनी है रंग में / कूची चित्रकार की।

© रवीन्द्र सिंह यादव

नई दिल्ली / इटावा (उत्तर प्रदेश )

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हिन्दी कविता, कहानी,आलेख आदि लेखन 1988 से ज़ारी. आकाशवाणी ग्वालियर से 1992 से 2003 के... View full profile
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