माँ

माँ

मेरे जीवन का हर पल माँ आपका कर्जदार है ।
खून की हर बूंद में आपका वात्सल्य प्यार है ।

जीवन और मृत्यु की डोर तो ईश्वर के हाथ है ।
पर प्यारभरा कोमल हिय बस आपके पास है ।

पंचतत्व के इस तन की अमर आत्मा आप हो ।
जीवन की हर स्वांस की जीवनदाता आप हो ।

आपके अस्तित्व से ही माँ मेरी तो पहचान है ।
आपका नाम रोशन करना अब मेरा काम है ।

तिलस्मी नाम सा ही तिलस्मी आपका प्यार है ।
समेट लो आंचल में कि यह मेरा अधिकार है ।

माँ ही तो मेरी पहली शिक्षक और संस्कार है ।
क्या रचना लिखूं माँ पर जो स्वयं रचनाकार है ।

– सौ.सुमिता राजकुमार मूंधड़ा
मालेगांव , नाशिक

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मैं बड़ी लेखिका-कवियत्री नहीं हूँ । बचपन से ही शौक से लिखती हूँ । लंबे...
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