माँ

माँ

मेरे जीवन का हर पल माँ आपका कर्जदार है ।
खून की हर बूंद में आपका वात्सल्य प्यार है ।

जीवन और मृत्यु की डोर तो ईश्वर के हाथ है ।
पर प्यारभरा कोमल हिय बस आपके पास है ।

पंचतत्व के इस तन की अमर आत्मा आप हो ।
जीवन की हर स्वांस की जीवनदाता आप हो ।

आपके अस्तित्व से ही माँ मेरी तो पहचान है ।
आपका नाम रोशन करना अब मेरा काम है ।

तिलस्मी नाम सा ही तिलस्मी आपका प्यार है ।
समेट लो आंचल में कि यह मेरा अधिकार है ।

माँ ही तो मेरी पहली शिक्षक और संस्कार है ।
क्या रचना लिखूं माँ पर जो स्वयं रचनाकार है ।

– सौ.सुमिता राजकुमार मूंधड़ा
मालेगांव , नाशिक

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 760

Like 75 Comment 222
Views 8.5k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing