माँ

गर्म तवे से हाथ जला जब
तुमने अपना फर्ज निभाई
स्तन से बूंदे टपकाकर
मेरे जख्मों पर लेप लगाई
कैसे भूलूं तेरा उपकार
कैसे दूध का कर्ज चुकाऊं
तेरे चरणों की धूल को “माँ”
माथे पर मैं तिलक लगाऊं

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"कुछ नया और बेहतर लिखने की चाह......" राजेश बन्छोर "राज" शिक्षा - सिविल इंजीनियरिंग में...
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