Dec 15, 2017 · मुक्तक
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माँ

तेरे एहसानों का शुक्रिया अदा
कैसे करूँ माँ
मैं तो दोज़ख़ के भी
क़ाबिल न था
तूने सीने से लगा,
जन्नत का बाशिंदा बना दिया।

-✍️अटल

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अटल चौबे
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Awards: "अटल" नाम ही, है पहचान मेरी। View full profile
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