कविता · Reading time: 1 minute

माँ

समय की घड़ी दिखाकर माँ मुझको समझायी तो थी
एक एक घड़ी जीवन की इकाई है बतलायी तो थी;
तब हमने माँ के हर इशारो को समझा और चला था
और फिर एक सवाल के जबाब मे माँ ने मुझको यह कहा था –
”समय से ही जिंदगी बनी है ”
हाँ माँ ! मैने इतना तो सुना था
माँ की यादों से यह याद तो जुड़ा था
जीवन जीने की कला माँ तुम्हीं से तो मिला था ॥

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