Jun 21, 2019 · कविता
Reading time: 1 minute

माँ

खूं अपना पिला कर तुम्हें जिस माँ ने संवारा
छोटी सी अज़िय्यत भी न दो उसको खुदारा

उठती है नजर जब भी मिरी माँ की तरफ तो
लगता है जैसे हो गया जन्नत का नजारा

सुख में तो माँ की याद भी आई नहीं कभी
तकलीफ आई तुझपे तो अब माँ को पुकारा

जिस बच्चे को देती हैं माँ दिल से दुआयें
उसका ही चमकता है क़िस्मत का सितारा

तू चाहे सितम जितने कर माँ पे मगर “आतिफ़”
थोडा सा भी दुख तेरा नहीं उसको गवारा

इरशाद आतिफ़ अहमदाबाद

1 Like · 108 Views
Copy link to share
Irshad Aatif
25 Posts · 942 Views
You may also like: