माँ

मां तुम याद बहुत आती हो
चूल्हे पर फुलके सेंक सेंक
कंगन के खनखन करते गीतों से
प्यार परोसा करती थी
माँ तुम याद बहुत आती हो

भीगी भीगी बरसातों में
पानी की नन्ही नन्हीं बूंदों सी
सब धो कर निर्मल कर जाती थी
उन धुले खिले भावों सी
माँ तुम याद बहुत आती हो

धरती के अंतर्मन की आग लिए
ऊपर से हरियाली दोशाले की ओट लिए
जीवन की ऊंची नीची राहों में
तुम नर्म सर्द एहसास लिए
माँ तुम याद बहुत आती हो

मीनाक्षी भटनागर
स्वरचित

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