माँ

मेरी हँसी तेरी ही पहचान सी होती है ,
तुम नही तो दुनिया ये अनजान सी होती है ।
हर एक माँ को सदा सलामत रखना ए मौला
ये एक माँ ही है जो पूरी जहान सी होती है ।

उनकी हर एक बातें इत्मिनान सी होती है ,
जिस घर में माँ ना हो वो वीरान सी होती है ।
ख़ुदा ने दिया है तुम्हें तो इज्ज़त किया करो
उनकी कमीं हर किसी को रोशनदान सी होती है ।

हर एक दिन उनके बिना बेज़ान सी होती है ,
दिन ढ़लती है मगर शामें बेईमान सी होती है
माँ के लिए वैसे तो कोई दिन मुकर्रर नहीं
हर एक वक्त हमारे लिए इम्तिहान सी होती है ।

ख्वाहिशों को पूरा करने की अरमान सी होती है ,
बचपनों की यादें भी अब उनवान सी होती है ।
मोहब्बतों को अब कही और न ढूंढो ‘हसीब’
ये वो है जहा मोहब्बतों की दुकान सी होती है ।

उनकी मोहब्बत भी सबके लिए आसमान सी होती है,
बहती दरिया भी कभी – कभी तूफ़ान सी होती है ।
माँ के लिए अब और लफ्ज़ क्या लिखूं ,
इक वही है जिसमें सारी बात जहान सी होती है ।

-हसीब अनवर

Like 3 Comment 2
Views 118

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119