माँ

मेरी हँसी तेरी ही पहचान सी होती है ,
तुम नही तो दुनिया ये अनजान सी होती है ।
हर एक माँ को सदा सलामत रखना ए मौला
ये एक माँ ही है जो पूरी जहान सी होती है ।

उनकी हर एक बातें इत्मिनान सी होती है ,
जिस घर में माँ ना हो वो वीरान सी होती है ।
ख़ुदा ने दिया है तुम्हें तो इज्ज़त किया करो
उनकी कमीं हर किसी को रोशनदान सी होती है ।

हर एक दिन उनके बिना बेज़ान सी होती है ,
दिन ढ़लती है मगर शामें बेईमान सी होती है
माँ के लिए वैसे तो कोई दिन मुकर्रर नहीं
हर एक वक्त हमारे लिए इम्तिहान सी होती है ।

ख्वाहिशों को पूरा करने की अरमान सी होती है ,
बचपनों की यादें भी अब उनवान सी होती है ।
मोहब्बतों को अब कही और न ढूंढो ‘हसीब’
ये वो है जहा मोहब्बतों की दुकान सी होती है ।

उनकी मोहब्बत भी सबके लिए आसमान सी होती है,
बहती दरिया भी कभी – कभी तूफ़ान सी होती है ।
माँ के लिए अब और लफ्ज़ क्या लिखूं ,
इक वही है जिसमें सारी बात जहान सी होती है ।

-हसीब अनवर

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 3 Comment 2
Views 116

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share