कविता · Reading time: 1 minute

माँ

मेरी खुशियाँ मेरी जन्नत मुझे याद आती है
प्यारी माँ याद तेरी मुझको बहुत आती है,

प्यारी बाते मेरी माँ मुझको बताना वो तेरा,
शाम को बैठ के क़ुरआन पढ़ाना वो तेरा,
रूठ जाता था मैं तुझसे कभी ए प्यारी माँ,
प्यार से फिर भी बिठा कर के मनाना वो तेरा,

तेरी यादें मेरी माँ मुझको रुला जाती है
प्यारी माँ याद तेरी मुझको बहुत आती है

हो सवेरा ढले शाम या के हो दोपहरा
फिजायें सहर की हो या के हो कोई सेहरा,
जबसे आया हूँ मैं परदेश मेरी अम्मी जाँ
जिस तरफ देखु नजर आए तेरा ही चेहरा

रात – दिन तू ही ख्यालों में नजर आती है
प्यारी माँ याद तेरी मुझको बहुत आती है

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Hindi & Urdu Poet
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