कविता · Reading time: 1 minute

माँ

दिनांक – 30 नवम्बर 2018,वार – शुक्रवार
🙏माँ का दर्जा भगवान के ऊपर व पहले है🙏
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जीवन का आधार है माँ,पहली पालनहार है माँ
माँ ही दिखलाती ये जहाँ,माँ सा जब भगवान ही नहीं,तो फिर ओर दूसरा कहाँ।
ममता की मूरत है माँ,सबसे खूबसूरत है माँ,
माँ गंगा,यमुना सरस्वती है,ब्रह्मा,विष्णु,महेश ही क्या,साक्षात भगवती है माँ।
माँ है तो सब कुछ न होने पर भी,स्वर्ग सा एहसास है माँ।
माँ के होने पर बस जगत का सारा सुख भी खारा,कभी न बुझने वाली प्यास है माँ।
बर्दाश्त कि हद है माँ, सर्वोच्च पद है माँ,
माँ पर क्या और कितना लिखें, माँ ही मन,मस्तिष्क,कलम,स्याही दवात है माँँ।
त्रैलोक्य में कोई भी विषय ऐसा नहीं,जिस पर कुछ लिखा न जा सकता हो,किन्तु सिर्फ और सिर्फ, एक अकेला अपवाद है माँ।
भगवान के बारे में फिर भी लिखा जा सकता है
पर माँ।
बस मौन व मौन रहकर मनन करने, महसूस करने का,सबसे मीठा एहसास है माँ।

#स्वरचित_स्वप्रमाणित_मौलिक_सर्वाधिकार_सुरक्षित*
अजय कुमार पारीक’अकिंचन’
जयपुर (राजस्थान)

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