23.7k Members 50k Posts
Coming Soon: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता

माँ

माँ जीती सन्तान के लिए
और मृत्यु को होती प्राप्त ।
जब तक जीती उसके मन में
वात्सल्य रहता है व्याप्त ।।

माँ की ममता, वात्सल्य की
कद्र न करती जो सन्तान,
उसका जीवन शापित होता
पाती है वह कष्ट महान ।।

माँ जैसा कोई न अन्य है
माँ की महिमा अगम अकूत ।
नर से लेकर नारायण तक
माँ ही करती सदा प्रसूत ।।

आओ हम माँ के गुण गाएँ
दें उसकी सेवा पर ध्यान ।
माँ की डाँट-डपट को भी हम
मानें ईश्वर का वरदान ।।

होना ही चाहिए सभी को
अपनी अपनी माँ पर गर्व ।
माँ को प्रणति निवेदन करके
हम सब सदा मनाएँ पर्व ।।

© महेश चन्द्र त्रिपाठी

3 Likes · 5 Comments · 11 Views
महेश चन्द्र त्रिपाठी
महेश चन्द्र त्रिपाठी
3 Posts · 74 Views
You may also like: