माँ

नमन सहित्यपिडिया
दिन :- मंगलवार
दिनांक :- 27/11/18
विषय :- माँ
विधा :- दोहा

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(1)
माँ की गोदी में मिले, सबको शान्ति सकून।
रग-रग में है दौड़ता, मात-पिता का खून।
(2)
बिन स्वारथ मिलता यहाँ, केवल माँ का प्यार।
बाकी रिश्ते यूँ लगें, जैसे हों व्यापार।
(3)
माँ की लोरी से बड़ा, नहीं कोई संगीत।
सोता बालक है तभी, जब माँ गाती गीत।
(4)
माता का आशीष ही, देता हरदम साथ।
हे भगवन रखिये सदा, सर पर माँ का हाथ।
(5)
माँ देती है हर समय, केवल सच्चा ज्ञान।
भूले से भी हो नहीं, माँ तेरा अपमान।
(6)
माँ के आँचल से मिले, सबको शीतल छाँव।
देखो स्वर्ग समान हैं, केवल माँ के पाँव।
(7)
इस मुख से कैसे करें, माँ तेरा गुणगान।
तुझसे तो छोटा लगे, मुझको ये भगवान।
(8)
माँ के प्यार दुलार में, नहीं स्वार्थ की गंध।
बालक का हर रूप ही, उसको रहे पसंद

*****************************
स्वरचित, स्वप्रमाणित
शिवेन्द्र सिंह चौहान”सरल”
ग्वालियर मध्यप्रदेश
9871164378

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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