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माँ

१२२ १२२ १२२ १२
गीतिका-माँ

मिली माँ जमीं को सितारा मिला।
हमें इस जहाँ में सहारा मिला।
मिली हो कि जैसे दुआ अनकही,
बिना कुछ कहे नेह प्यारा मिला।
रखा क्या धरा पर जिसे निज कहें,
हमें माँ मिली सब हमारा मिला।
दिया था डुबो इस जहाँ ने जिसे,
उसे हाथ माँ के किनारा मिला।
लिये गोद ‘हेमा’ दिखे लाल को,
सुखद ये बड़ा ही नजारा मिला।
✍हेमा तिवारी भट्ट✍
मुरादाबाद

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

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हेमा तिवारी भट्ट
हेमा तिवारी भट्ट
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लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है,...