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माँ ......

माँ…
माँ जीवन का आगाज़ है,
माँ एक जीने का अंदाज़ है|
माँ…
माँ अपनेपन की आवाज़ है,
माँ आनंद की आभास है|
माँ…
माँ प्रेम भी है माँ स्नेह भी है,
माँ तपते हुए लोहे की देह भी है|
माँ…
माँ है तो प्यार है,
माँ है तो एक मीठी सी मार है|
माँ…
माँ है तो दही गुड़ की कटोरी है,
माँ से ही रातों की लोरी है|
माँ…
माँ भूत, भविष्य, वर्तमान है,
माँ मेरी धरा और आसमान है|
माँ…
माँ सपनो की आस है,
माँ मेरी हर सांस है|
माँ…
माँ एक दिव्य दमक है,
माँ से ही चेहरे पर चमक है।
माँ….
माँ वो अभिन्न अंग है,
जो हर वक़्त बच्चों के संग है|
माँ…
माँ से ही प्रीत है,
माँ मीठी सी एक गीत है|
माँ…
माँ एक मधुर मुस्कान है,
माँ मेरी हर एक उड़ान है|
माँ…
माँ हैं तो न कोईं गम है,
माँ हर मर्म की मरहम है|
माँ…
माँ प्रसन्नता की द्वार है,
माँ ही जीवन का उद्धार है|
माँ…
माँ ईश्वर की देन है,
माँ ही हर सुख चैन है|
माँ…
माँ ही अमानत है,
माँ ही मेरी मन्नत और जन्नत है|
माँ…
माँ कर्मों का फल है,
माँ के पास हर कष्टों का हल है|
माँ…
माँ जिंदगी है,
माँ वंदगी है|
माँ…
माँ ही तो पूजा है,
माँ के बिना न कुछ दूजा है|
माँ…
माँ शक्ति है, माँ भक्ति है,
माँ से ही तो आशक्ति है|
माँ…
माँ ही करुणा है,
माँ नही तो ये जग सूना है||

-वेदप्रकाश रौशन

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वेदप्रकाश रौशन
वेदप्रकाश रौशन
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हिंदी का उपासक, सहित्य प्रेमी । सांस्कृतिक बचाव के लिए एक छुपा हुआ छोटा सा...