माँ

डॉ सुनीता सिंह
हरियाणा

माँ

प्रकृति सी हरी भरी
मखमली गोद वाली है माँ I
सीधी रेखा सी सरल
स्मित मुस्कान वाली है माँ I
सागर सी गहरी
अनन्त आशाओं वाली है माँ I
ज्योति सी दीप्त
झिलमिल सितारों वाली है माँ I
कुमकुम सी खिली
पवित्र ऋचाओं वाली है माँ I
उडुगन सी पंख फैलाये
जहां को समेटने वाली है माँ I
दर्पण सी सत्य
भगवन की सुरत वाली है माँ I
यह मेरी मैलिक रचना है अन्यत्र प़काशित नही है।धन्यवाद

Like 16 Comment 25
Views 248

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing