31.5k Members 51.9k Posts

माँ

Nov 25, 2018 07:23 PM

कि लगा बचपन में यू अक्सर अँधेरा ही मुकद्दर है.
मगर माँ होसला देकर यू बोली तुम को क्या डर है,

मै अपना पन ही अक्सर ढूंढती रहती हुँ रिश्तो में
तेरी निश्छल सी ममता कहीं मिलती नहीं माँ.

गमों की भीड़ में जिसने हमें हंसना सिखाया था
वह जिसके दम से तूफानों ने अपना सिर झुकाया था

किसी भी जुल्म के आगे, कभी झुकना नहीं बेटी
सितम की उम्र छोटी है मुझे माँ ने सिखाया था

भरे घर में तेरी आहट कहीं मिलती नहीं माँ
तेरी हाथों की नर्माहट कहीं मिलती नहीं माँ

मैं तन पर ला दे फिरता दुसाले रेशमी
लेकिन तेरी गोदी की गर्माहट कहीं मिलती नहीं माँ

तैरती निश्छल सी बातें अब नहीं है माँ
मुझे आशीष देने को अब तेरी बाहें नहीं है माँ

मुझे ऊंचाइयों पर सारी दुनिया देखती है
पर तरक्की देखने को तेरी आंखें नहीं है बस अब माँ

-शशी लता जैन

8 Likes · 9 Comments · 44 Views
Shashi Jain
Shashi Jain
1 Post · 44 View
You may also like: