माँ

विषय-: माँ
विधा-: पद्य छन्दमुक्त

गिरने से पहले थाम लेती है,
फिसलने से पहले संभाल लेती है।
मैं लाख छुपाउं, मेरे माथे की-
शिकन पहचान लेती है।
बिन बताए मेरी तकलीफ की,
वजह जान लेती है।
मेरे भूख प्यास के लिए,
मेरे आगे पीछे भागती है।
मेरी परीक्षा के लिये अलार्म-
की तरह रात भर जागती है
मेरी एक कामयाबी पे,
मुहल्ले को मिठाइयां बाँट देती है।
अपने ग़मों से मेरे लिए ,
खुशियां छांट लेती है।
मेरे स्वास्थ्य की चिंता में,
स्वयं अधमरी हो जाए।
काजल के टीके में टोटका,
आस्वस्त गहरी हो जाए।
टूटने से पहले थाम लेती है ,
ज़िंदगी की डोर!
सचमुच “माँ” होती है-
‘बुरी बलाओं, की शातिर चोर!!

शकुन्तला शेंडे(शकुन)
शहर -बचेली
छत्तीसगढ़

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 20

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 2 Comment 27
Views 57

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share