माँ

इक्कीस बरस का वैधव्य जीवन ढोती माँ;
बाईस बरस की बेटी की चिंता करती माँ।।
नौकरी में तबादले पर दर दर फिरती माँ;
नैनों के नीर में मुस्कानें धरती माँ।।
जिन्दगी के पन्नों को सियाह करती माँ;
हर पल अपने उनको याद करती माँ।।
कैसे करुँ बेटी के पीले हाथ,क्या न सहती माँ;
क्यूँ ना ले गये मुझे भी साथ, अकेले में कहती माँ।।…

सपना दत्ता
नई दिल्ली

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

Voting is over for this competition.

Votes received: 36

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 6 Comment 25
Views 261

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share