माँ

माँ ने मुझको दिखलाई है इस संसार को
माँ ने मुझमे रग रग भर दी संस्कार को
रात को भी माँ जग जग कर दूध पिलाती थी
मेरे लिए गीली बिस्तर पर सो जाती थी
सब कुछ माँ के अनुकूल तैयार करो
सबसे बड़ी शक्ति है माँ, माँ को प्यार करो ।

माँ की अंगुली पकड़ कर खड़ा हुआ
माँ के पद चिन्हो पर चल कर बङा हुआ
माँ के शब्दो से बोलना और हँसना सीखा
माँ के कर्मो से ही दुनिया में सुंदर दिखा
माँ के जैसा कोई नहीं है इसे स्वीकार करो
सबसे बड़ी शक्ति है माँ, माँ को प्यार करो।

ज्ञान के सागर को गागर में समाई है
मानवता का रास्ता माँ ने ही दिखलाई है
बङा हुआ हूँ अब माँ की सेवा करना है
जीवन में माँ का कुछ तो कर्ज चुकाना है
सब कार्यो के लिए माँ से भी विचार करो
सबसे बड़ी शक्ति है माँ, माँ से प्यार करो ।

जय प्रकाश निराला
नवादा ( बिहार )
M/W- 9708618984

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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