Nov 22, 2018 · कविता
Reading time: 1 minute

माँ

अभी-अभी तो सोई थी

अभी-अभी वह जाग गया,

माँ की उनींदी आँखों से

सुन्दर सा सपना भाग गया ,

छिल चुकी छाती से

अपने नन्हे को लगाती है,

माँ कितनी भोली है

‘सपने’को स्वप्न दिखाती है”

-ऋतुजा सिंह बघेल
लखनऊ

Votes received: 50
7 Likes · 41 Comments · 371 Views
Copy link to share
Rituja Baghel
1 Post · 371 Views
You may also like: