माँ

माँ तुमको मैं कैसे लिख दु तुम शब्दो मे कैसे आओगी …
अपना सबकुछ देकर बस मुझमे खुद को पाओगी ..
माँ तुमको मैं……..

कैसे बिताये हैं तुमने वो दिन माँ जब हमें होश न था
हमें सुलाकर सुखे मे खुद को गंदगी का अफसोस न था
जहाँ कहीं भी देखना माँ मुझको चरणो मे पाओगी …
माँ तुमको मैं……..

लिख दु चाहे वनो पत्तियो पर और सागर की स्याही से
मेरी माँ लिखी ना जाएं इस जीवन की भरपाई से ..
जहां भी रख दे इस टुकड़े को खुद का प्रतिबिंब पाओगी
माँ तुमको मैं…………

मेरी दूर्गा मेरी शारदा मेरी सांस ह्रदय और तकदीर हो तुम
तुम्ही जीने का तरीका मेरी भाग्य कर्म की लकीर हो तुम
तेरी सीख है मेरा तन मन सब माँ भारती मे पाओगी
माँ तुमको मैं ………

लक्ष्मी नारायण उपाध्याय (अध्यापक )JMA
साहवा जिला चुरू राजस्थान

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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