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माँ

Shri Bhagwan Bawwa

Shri Bhagwan Bawwa

कविता

May 14, 2017

आंचल तुम्हारा दरख्तों की छाया है माँ,
हर धूप से टकराना तुमने सिखाया है माँ,
तुम बेशक कहीं दूर सितारों में रहने लगी,
मेरे सर पर हमेशा तुम्हारा ही साया है माँ !

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